आओ तुमको लेकर चलूँ

आओ तुमको लेकर चलूँ
जहाँ भूख है, लाचारी है
गरीबी है और उन्हें ख़त्म करने के
झूठ मूठ के वादे हैं

जहाँ बंद किसी कमरे में
कर्जा ना चुका पाने पर
मुर्दा किसानों की
पंखे से लटकी लाशें हैं

जहाँ हर पल ही
पाँव फैलाती
ढेर सारी बीमारी हैं

जहाँ बाढ़ है, सूखा है
और उस पर दिया हुआ
राहत पैकेज है

जहाँ जात-पात और धर्म की
झूठी शिक्षा देने वाले लोग हैं

जहाँ मंदिर बनाने के लिए
चन्दा इकठ्ठा किया जाता है
पर एक अदद स्कूल का
नाम तक जुबान पर नहीं आता

जहाँ क़र्ज़ है
और उस पर भी लगता
साहूकारों का ब्याज है

जहाँ पानी की प्यास है
और उस पर दूर से
आती दिखती
मौत की आस है

आओ तुम्हे लेकर चलूँ ...

तब शायद
ये बात दूर तक जाये

15 comments:

Amit K Sagar said...


मार्मिक रचना. लिखते रहिये.

श्याम सखा 'श्याम' said...


न चैन ही मिले यहां,न भूख ही मिटे कभी
यही अगर है जिन्दगी,क्या जिन्दगी कहें इसे
ब्लॉग जगत पर स्वागत है-अगर word verification
लगाया है तो हटा दें
श्याम अगर कविता या गज़ल में रुचि हो तो मेरे ब्लॉग पर आएं
http://gazalkbahane.blogspot.com/ कम से कम दो गज़ल [वज्न सहित] हर सप्ताह
http:/katha-kavita.blogspot.com दो छंद मुक्त कविता हर सप्ताह कभी-कभी लघु-कथा या कथा का छौंक भी मिलेगा
सस्नेह
श्यामसखा‘श्याम’

Lalit Bharti said...


आपने बहुत अच्छा लिखा है ....प्रशंसा के लिए शब्द नहीं मिल रहे

वन्दना अवस्थी दुबे said...


चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है...शुभकामनायें.

श्यामल सुमन said...


आखिर ऐसी जगह जा कर भी क्या होगा जहाँ-

खाक और खून के ये लोग बिछौने देंगे।
रोटियाँ छीनकर बच्चों से खिलौने लेंगे।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
मुश्किलों से भागने की अपनी फितरत है नहीं।
कोशिशें गर दिल से हो तो जल उठेगी खुद शमां।।
www.manoramsuman.blogspot.com
shyamalsuman@gmail.com

RAJIV MAHESHWARI said...


सुंदर अति सुंदर लिखते रहिये .......
आपकी अगली पोस्ट का इंतजार रहेगा
htt:\\ paharibaba.blogspost.comm

दिगम्बर नासवा said...


भाव पूर्ण लिखा है ...........मार्मिक रचना.........गहरी अभिव्यक्ति है

Abhishek Mishra said...


Kya baat hai! Swagat.

mark rai said...


उजाले को पी अपने को उर्जावान बना
भटके लोगो को सही रास्ता दीखा
उदास होकर तुझे जिंदगी को नही जीना
खुला गगन सबके लिए है , कभी मायूश न होना
तुम अच्छे हो, खुदा की इस बात को सदा याद रखना....
.......शुभकामनायें.

संगीता पुरी said...


बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

समयचक्र - महेन्द्र मिश्र said...


ब्लॉग जगत में और चिठ्ठी चर्चा में आपका स्वागत है . आज आपके ब्लॉग की चर्चा समयचक्र में ..

दिल दुखता है... said...


आपका हिंदी ब्लॉग की दुनिया में स्वागत है... और श्री हनुमान जी की जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएं.....

dr.bhoopendra singh said...


sunder abhivyakti bandhu ,aapme aag hai ye manta hoon
meri amit mangalkamnayen aapke liye
aapka hi dr.bhoopendra

Kavyadhara said...


Saans jaane bojh kaise jivan ka dhoti rahi
Nayan bin ashru rahe par zindagi roti rahi.

Ek mahal ke bistare pe sote rahe kutte billiyaan
Dhoop me pichwaade ek bachchi choti soti rahi .

Ek naajuk khwaab ka anzaam kuch easa hua
Main tadapta raha idhar wo us taraf roti rahi

Tang aakar Muflisi se khudkushi kar li magar
Do ghaz qafan ko laash uski baat johati rahi

Bookh gharibi,laachari ne umar tak peecha kiya
Mehnat ke rookh par zardian tan pe phati dhoti rahi

Aaj to us maa ne jaise - taise bachche sulaa diye
Kal ki fikr par raat bhar daaman bhigoti rahi.

“Deepak” basher ki khawahishon ka qad itna bad gaya
Khawahishon ki bheed me kahi zindagi khoti rahi.
@ Kavi Deepak Sharma
http://www.kavideepaksharma.co.in
http://www.shayardeepaksharma.blogspot.com

Chintan - चिन्तन said...


यही यथार्थ है !!



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