वैल्यू बनाम आम आदमी

रिक्शेवाले के शरीर से पसीने छूट रहे थे और वो छतरी ताने रिक्शे पर बैठी थी. जल्दी से रेस्टोरेंट के सामने उतर उसने काला चश्मा उतारा और अपने बालों पर लगा लिया और 10 का नोट निकाल रिक्शेवाले को देने लगी. क्या मेमसाहब इतनी दूर से लाया हूँ और आप ये 10 का नोट दे रही हैं यहाँ तक के तो 25 रुपये होते हैं. चुपचाप रख लो फालतू चिकचिक न किया करो. नहीं मेमसाहब ये तो गलत बात है. ये रहे 15 रुपये लो और चलते बनो. रिक्शेवाला अपना उतरा सा मुंह लेकर अपना पसीना पोंछने लगा ...और मेमसाहब अपने हाथों में काला चश्मा पकड़ रेस्टोरेंट के अन्दर गयी ...अपने बॉय फ्रेंड से ढेर सारी गप्पे मारी और खाना पीना खाया फिर अंत में जब उठने की बारी आयी तो अपने प्रेमी से पूंछने लगी कितने रुपये रख रहे हो इसमें ...क्यों पूरे 110 रुपये. क्या सिर्फ 10 रुपये टिप के दोगे. अगली बार से वो दुआ सलाम भी नहीं करेगा. उसमे २० रुपये एक्स्ट्रा रख दो. अपनी वैल्यू बनाने के लिए ये सब करना पड़ता है . प्रेमी ने अपनी प्रेमिका की बात मानी और पर्स निकल 10 रुपये और रख दिए. मेमसाहब ने काला चश्मा आँखों पर पहन अपना बैग उठाया और बाहर निकल चले ....बाहर फिर से वही इन्सान खडा था पसीना पौंछता हुआ ....

6 comments:

अनिल कान्त : said...


वाह क्या लिखा है ...कमाल कर दिया जनाब आपने ....आपके लेखन में एक विशिष्टता दिखाई देती है ...आप यूँ ही हिंदी साहित्य को सम्रद्ध करते रहेंगे ऐसी आपसे आशा करते हैं

Lalit Bharti said...


मैं पहली पंक्ति से ही आत्म मुग्ध हो गया ....मुझे लगता है कि आपकी सभी रचनाओं का ख़ास ध्यान रखना पड़ेगा ...आपकी अगली रचना के इंतजार में

Sunil Bhaskar said...


Shukriya doston, apne is lekh ko apna kimti samay diya.

Debasish said...


It's really a effective lesson specially to those people who started earning at a very young age and because of which they loose on their judgement abilities to evaluate others.

Hope this thought reaches to each and everyone....

See the world with your naked eye. Then only you will be able to justify your life.

Aditi said...


really good one...

bharti said...


TU BAN JA ESI AAG, SULAG KE JO JHAN KO ROSHAN KAR DE,

TERE KADAMO KE NISHAN PE CHALE SARI DUNIYA.

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its realy very nice. If I say in my words this view is God given you & you distribute with your friends.

BHARTI CHAUDHARY



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